रांची का रथयात्रा

रांची का जग्गनथ्पुर मेला
ओड़िशा के पुरी के अलावा झारखंड की राजधानी रांची में भी रथयात्रा का उत्साह देखने को मिल रहा है. पूरी के बाद रांची का जगन्नाथ मेला भारत भर में मशहूर है. इस मेले को देखने लोग दूर दूर से आते हैं. रांची में भगवान जगन्नाथ की प्रसिद्ध रथयात्रा की तैयारी हफ्तों पहले से शुरू हो जाती है.
रांची के जगन्नाथपुर मेले का इतिहास
रांची में रथयात्रा की परंपरा 326 सालों से चली आ रही है. उन दिनों छोटानागपुर में नागवंशी राजाओं का शासन था. राजधानी रांची के जगन्नाथपुर में बने भगवान जगन्नाथ के भव्य मंदिर से हर साल न-जुलाई के महीने में रथयात्रा का आयोजन किया जाता है. इस मंदिर का निर्माण बड़कागढ़ के महाराजा ठाकुर रामशाही के चौथे बेटे ठाकुर ऐनीनाथ शाहदेव ने 25 दिसंबर, 1691 में कराया था. मंदिर का जो वर्तमान स्वरूप दिखता है, वह 1991 में बना. मंदिर का लंबे समय बाद 1991 में जीर्णोद्धार किया गया था. उस समय करीब एक करोड़ रुपए खर्च हुए थे. वर्तमान मंदिर पुरी के जगन्नाथ मंदिर के स्थापत्य की तर्ज पर बनाया गया है. गर्भ गृह के आगे भोग गृह है. भोग गृह के पहले गरुड़ मंदिर हैं, जहां बीच में गरुड़जी विराजमान हैं. गरुड़ मंदिर के आगे चौकीदार मंदिर है. ये चारों मंदिर एक साथ बनाए गए थे.
जगन्नाथ मंदिर, रांची में रथयात्रा का इतिहास भी नागवंशी राजाओं से जुड़ा है. उन्होंने कई भव्य मंदिरों का निर्माण कराया तथा विग्रह स्थापित कर विशेष पूजा-अर्चना शुरू की थी. 326 साल पहले यहां हर जाति और धर्म के लोग मिल-जुलकर रथयात्रा का आयोजन करते थे. श्री जगन्नाथ को जहां घंसी जाति के लोग फूल मुहैया कराते थे, वहीं उरांव घंटी प्रदान करते थे. मंदिर की पहरेदारी मुस्लिम किया करते थे. राजवर जाति द्वारा विग्रहों को रथ पर सजाया जाता था. मिट्टी के बर्तन कुम्हार देते थे. बढ़ई और लोहार रथ का निर्माण करते थे. अब इस रथयात्रा का आयोजन ट्रस्ट के द्वारा कराया जाता है.
अक्षय तृतीय के दिन से ही रथयात्रा की शुरुआत हो जाती है, उस दिन से भगवान जिस रथ में यात्रा करते हैं, उसकी पूजा होती है. भगवान स्नान मंडप में आते हैं और वहां पर उनका अभिषेक किया जाता है. भगवान की आरती की जाती है और इसके बाद भक्तों को भी भगवान का अभिषेक करने का मौका मिलता है. इसके बाद भगवान को एकांतवास में भेज दिया जाता है, वहां पर उनका श्रृंगार किया जाता है. आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा तक उनका श्रृंगार का कार्य पूरा हो जाता है. उसी दिन नेत्रदान का अनुष्ठान होता है. अनुष्ठान के बाद भगवान अपने भक्तों के लिए विराजमान होते हैं. गगनभेदी जयकारों की गूंज के साथ नौ दिन तक चलने वाले भगवान जगन्नाथ के रथयात्रा के महोत्सव की शुरुआत होने वाली है. रांची के धुर्वा स्थित जगन्नथ मन्दिर से रथयात्रा शुरू होगी, जिसमें भगवान जगन्नथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मौसीबाड़ी पहुंचेंगे. रथयात्रा के शुरू होने पर हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु रथ को खींचते हैं. पुरुष वर्ग के साथ साथ महिला वर्ग भी रथ को खींचने में अहम भूमिका निभाते हैं.
रथ से बंधी रस्सी को छूने की होड़ रहती है. भक्तों में आधा किलोमीटर की रथयात्रा का सफर डेढ़ घंटे में पूरा होता है. मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ के रथ की रस्सी को खिंचने से मोक्ष की प्राप्ति होती है. ओडिशा शैली में निर्मित इस मंदिर में पूजा से लेकर भोग चढ़ाने का विधि-विधान भी पुरी जगन्नाथ मंदिर जैसा ही है. कई बार रथ को खींचने के क्रम में रस्सी टूट जाती है, और ऐसी मान्यता है कि यात्रा के दौरान भगवान रूठते हैं इसलिए रस्सी टूटती है.
    
प्रत्येक दिन मन्दिर परिसर में कोई न कोई धार्मिक उत्सव आयोजित किया जाता है. मन्दिर में आचार-व्यवहार पूजा पद्धति वैष्णव, बौद्ध, शैव और जैन धर्मावलम्बियों द्वारा प्रभावित है.
इन दिनों यहां झरखंड के अलावा आस पास के राज्य जैसे बिहार, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल से हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं. बहुत भारी मेला भी इन दिनों यहां लगता है. रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ को दशावतारों के रूप में पूजा जाता है, उनमें विष्णु, कृष्ण, वामन और बुद्ध हैं. राजधानी रांची के धुर्वा और रातु में इसकी विशेष धूम रहती है.
      
भगवान को 9 दिनों तक मौसीबाड़ी में रखा जाता है. 22 जुलाई को घुरतीरथ/ घुरती मेला का आयोजन किया जाएगा. इसके बाद भगवान मुख्य मंदिर में लौट आएंगे. उस दिन भी भगवान को रथ से मंदिर तक पहुंचाया जाएगा, इसे घुरती रथ कहते हैं.
इस बार रथ यात्रा मेला है खास
14 जुलाई से शुरू होने वाली रथ यात्रा का मेला कई माइने में इस साल खास है. मेला में तरह तरह के खेल खिलौने के साथ साथ खाने पीने के लिए भी ढेर सारे स्टॉल लगाए गए हैं. इसके अलावा धुर्वा के शहीद मैदान में लगे सर्कस का भी आनंद बच्चे ले सकेंगे.
झारखंड के सबसे बड़े मेलों में से एक का आनंद हर कोई उठाना चाह रहा है. जुलाई से 9 दिनों तक रांची में एक पर्व सा माहौल होता है. देश के कई राज्यों से दुकानदार आते हैं और यहां के लोग उनकी संस्कृतियों से परिचित होते हैं. उत्साह खासकर बच्चों और महिलाओं में देखने लायक रहता है.
Please follow and like us:

2 thoughts on “रांची का रथयात्रा

Leave a Comment

Social media & sharing icons powered by UltimatelySocial
Facebook
Facebook
Google+
Google+
http://blog.askranchi.com">
YouTube
YouTube
INSTAGRAM
Design And Developed by TechRBJ